पुरुषों के प्रति मेरे अविश्वास को विश्वास प्रदान किया तुमने

मेरे प्रिय         बात यहां ख़तोकिताबत की नहीं है, विकल्प की है, क्योंकि प्रत्यक्ष…

प्यारी सखी! मैं भी तुम्हारी तरह एक आम मां हूं

प्यारी सखी पहले तो माफ़ी क्योंकि ये दोस्ती के उसूलों के खिलाफ है कि दो दोस्तों…

कुमाऊंनी में चिट्ठी और डाकिये की बात

क्या हैं सपने जो हम देखते हैैं? जब बच्चा था मां के पास बैठकर पूछता रहता था

दोस्तों ये ख़त मेरा उन सभी युवा साथियों के लिए है जो रोज़मर्रा की भेड़चाल से…

तुम्हारा व मानव-सभ्यता का शुभेच्छु “हॄदय”

प्रिय मन, ‌अभी तुम्हें आकर लेते बहुत अधिक सहस्त्राब्दियाँ नहीं बीतीं और न ही अधिक देर…