मां का खत बेटे के नाम- तुम्हें बड़ा होते देखना सुकून भरा है

(Priyanka Om Letter to her Son ) आजकल हिंदी फ़िल्म में फ़िल्मायें गये रूमानी दृश्य को तुम बहुत ध्यान से देखने लगे हो। तुम बड़े हो रहे हो। तुम्हें बड़ा होते देखना सुकून भरा काम है। अभी दो साल पहले ही तो बमुश्किल तुम जूते का फीता बांधना सीख पाये हो और कुछ दिन पहले तक तुम्हारे लम्बे बाल मैं ही संवारती थी और मेरी सहेलियां तुम्हें रणवीर पुकारती है ।

कुछ बातों में तुम अपने पापा की तरह हो और कुछ बातों में मेरी तरह, इसमें कुछ नया नहीं है और इस बात में भी नया नही है कि तुम्हारे पापा तुम्हारे हीरो हैं, आख़िर क्यूं ना हो सभी बच्चों के होते हैं । बालपन में मेरे हीरो भी मेरे पापा ही थे । मां तो बेटों की हीरोइन होती है, फेवरेट हीरोइन। मां के रूप सौंदर्य पर रीझते बेटों के स्वप्न में निर्बाध विचरण करने वाली नायिका होती है मां ।

तुम्हारे पापा को बच्चे बहुत प्रिय थे। और मुझे बिलकुल भी पसंद नही थे, तुम्हारे पापा को कम से कम पांच साल तक पापा नहीं बनना था लेकिन मुझे जल्दी की ज़िद्द थी और ज़िद्द इस बात कि भी थी की तुम ही हो जबकि पापा के कामनाओं में बिटिया थी । लेकिन आदतन तुम्हारे पापा ने हमारी चाहनाओ की लड़ाई में मुझे जीतने दिया और तुम आये । यह तुम्हीं हो मुझे तीसरे महीने ही अफ़्रीका के एक हॉस्पिटल में पता लग गया था ।

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इतनी तो नासमझ थी तुम्हारी मां कि जब पांचवे महीने तुमने पहली बार लात मारी थी लगा एसिडिटी हुई है मुझे, इस बात पर मेरी बुआ को बहुत हंसी आई थी और मेरे पापा ने हमेशा की तरह कहा था “अभी तो ख़ुद बच्ची है” जबकि मेरी कई सहेलियों के बच्चे स्कूल जाने लगे थे । तुम्हें ये सब सुनकर अजीब लगेगा, बल्कि यह सबकुछ अजीब है भी । अजीब मुझे भी लगता था आइना देखना, घर से बाहर निकलना ।

अंतिम कुछ महीनों में तो मैं डॉक्टर के अलावा कहीं नही जाती थी, आइना तो देखती ही नहीं थी । नही शर्म नही आती थी, दरअसल बढ़े हुए पेट में मैं ख़ुद को अच्छी नहीं लगती थी इसलिये । नौ महीने तक अपने भीतर तुम्हारी परवरिश के दौरान तमाम तरह की हरी साग सब्ज़ियाँ खाना सीखा, जो कभी नही खाती थी वह सब खाने लगी थी कि वह तुम्हारे लिये अच्छा है ।

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दूध तो ऐसे पीती थी मानो पानी हो, ठंडा गर्म कैसा भी फ़र्क़ नही पड़ता था, चुपचाप पी लेती थी कि तुम्हारी हड्डियाँ मज़बूत होगी और तुम जन्म के बाद नौवें महीने में दौड़ने लगे थे जबकि ढाई महीने के तुमको लेकर आने के बाद मैंने कभी तुम्हारी तेल मालिश नही की । तुम्हारे पापा ने कहा विदेशियों के तेल मालिश नहीं होती फिर भी वे चलते और दौड़ते भी हैं । पूरे नौ महीनों में मैं कभी ठीक से सोई नहीं, मुझे रात- रात भर नींद नहीं आती थी, अक्सर पेट में, बिकिनी एरिया में बहुत दर्द रहता था ।

दिन में भी बामुश्किल सो पाती थी । तुम्हें कैरी करना बहुत असहाय लगता था और तुम थे कि बाहर आने का नाम ही नहीं ले रहे थे । नौ महीने पूरे हो जाने के बाद भी तुम्हें उस अंधेरी गुफा से बाहर निकलना ही नहीं था शायद । फिर एपिडूरल और सी सेक्शन के बाद तुम दुनिया में आये, आये क्या लाया गया, ज़बरन ।

पहले डिलीवरी पेन के लिये इंजेक्शन दिया गया, फिर एपिडूरल के लिये मेरे स्पाइन में इंजेक्शन दिया गया था, लेकिन तुम थे कि बाहर ही नहीं आना चाहते थे, तुम अंदर ही कहीं कोइल में अटक गये फिर लोकल इनेस्थेसिया दिया गया लेकिन कमर से नीचे का हिस्सा नम होने के बावजूद मैं अपने निचले पेट पर ब्लेड चलना महसूस कर रही थी ! मुझे साफ़ साफ़ पता चल रहा था मेरा पेट काटा जा रहा है ।

प्रियंका तुम्हारी बेटी बहुत प्यारी है । डाक्टर्स मेरा ध्यान भटका रहे थे ।
नहीं मेरा तो बेटा है ।
तुम्हें कैसे पता ।
वो मेरे पेट में क्रिकेट खेलता था ।
हंसने की कई आवाज़ें आइ थी । आस पास कई डाक्टर्ड थे, शायद मेरा केस कॉम्प्लिकेटेड था !  उसके बाद उआं उआं की मधुर आवाज़ जिसे सुनने के बाद स्त्री का दूसरा जन्म होता है । तुम्हें देखने के बाद पता चला दुनिया अपने सूक्ष्मतम रूप इतनी दिलकश हो सकती है ।

मेरे पति को दिखा दो प्लीज मैंने तुम्हें जीभर कर देखने के बाद कहा । तुम्हारा पति कौन है ? ये किसी दूसरे डॉक्टर की आवाज़ थी जो मुझे कहीं दूर से आती हुई मालूम पड़ रही थी !  वो जो बाहर खड़ा रो रहा होगा, ये कहते हुए पता नही मैं ख़ुश थी या उदास अब मुझे ठीक से याद नही !

तुम्हें कैसे पता वो रो रहा है ? ये नई आवाज़ थी !
मैं जानती हूँ वो मुझे तकलीफ़ में नही देख सकता ।
फिर उसके बाद मुझे कुछ याद नही, होश आया तो मशीनों से भरे एक अलग कमरे में अकेली पड़ी थी । मेरी देह से लगा मेरे ही देह का हिस्सा मेरे पास नहीं था ।

तुम्हारे जन्म के बाद मुझे तुमसे अलग कर दिया गया, मुझे इंटेन्सिव केयर में रखा गया । उधर तुमने रो -रो कर पापा को दादी को बहुत परेशान किया । तुम्हारे पापा तुमसे नाराज़ थे, कि तुम्हारे कारण मैं उस दिन उस स्तिथी में थी । वह तुम्हें गोद में भी नहीं ले रहे थे यह सब मुझे तुम्हारी दादी ने मुझे बताया ।

कुछ दिनों बाद तुम्हें गोद में लिये मैं घर तो आ गई लेकिन बार बार तुम्हारे सु-सु पॉटी और फिर तुम्हारी भूख से परेशान हो गई । तुम्हारे पापा और मेरा रोल इक्स्चेंज हो गया । तुम्हारी पहली पॉटी तुम्हारे पापा ने साफ़ की, रात को भूख से रोने पर वह उठकर दूध बनाते और तुम्हें पिलाते, हां Lectosis Deficiency के कारण मैंने तुम्हें टॉप फ़ीड करा कर बड़ा किया है।

मैं आराम से सोती और कभी कभी इरिटेट होती । यह सिलसिला तुम्हारे डेढ साल के हो जाने तक चला, तुम्हें नींद ही नहीं आती थी जैसे मुझे प्रेग्नन्सी में नहीं आती थी । तुम्हारे पापा अपने कंधों पर तुम्हें लिये तुम्हारे सो जाने तक टहलते रहते । तुम्हारे बीमार होने पर तुम्हारे पापा जागते थे मैं बीच बीच में उठ कर देखती थी बस । शायद यही कारण है कि तुम अपने पापा से अधिक अटैच्ट हो और मैं तुम्हें पापा का चम्मच कहती हूँ मेरी मम्मी भी मुझे पापा का चम्मच कहती थी ।

लेकिन जाने क्यूंकर तुम्हें ये लगता है तुम्हारे पापा तुमसे अधिक मुझसे प्रेम करते हैं, सिर्फ़ इसलिये कि क्रिकेट खेलते हुए वह मुझे ठीक बॉल देते हैं और कभी कभी जीतने देते हैं । जानते हो क्यूँ ? क्यूँकि यदि वह ऐसा नही करेंगे तो मैं तुम दोनो के साथ कभी नही खेलूँगी …जबकि तुम्हें तो अभी सीखना है ..सीख सीख आगे बढ़ना है । अभी पिछले दिनों ही किसी बाबत मैंने कहा मैं और पापा एक दूसरे से अधिक आपसे प्रेम करते हैं तो तुम्हारी आँखें आश्चर्य से बड़ी हो गई और तुमने अचरज से पूछा “सच ?”

बिलकुल सच । दुनिया के तमाम पेरेंट्स एक दूसरे से अधिक अपनी संतान से प्रेम करते हैं । तुम चुप हो गये थे, तुम ऐसा तब करते हो जब सहमत नही होते लेकिन एक दिन तुम समझ जाओगे मैं जानती हूँ ! तुम हाइपर ऐक्टिव हो पापा की तरह, मेरी तरह आलसी नही, ज़्यादातर तुम पापा के जैसे हो उन सबमे Over Emotional  होना कॉमन है । मेरी तरह आर्ट में तुम्हारी कोई दिलचस्पी नही है तुम्हें पापा की तरह मैथ और साइयन्स में इंट्रेस्ट है । भले ही क्लास में टॉप नही करते लेकिन मैथ तुम उँगलियों पर करते हो और तुम्हारी डेंटिस्ट तुम्हें आर्यभट कहती है ।

तुम Soccer में बहुत अच्छे हो, तुम Soccer Player बनना चाहते हो लेकिन अपने पापा की तरह तुम्हारा गाड़ियों से प्रेम देखकर मुझे हमेशा ही लगता है तुम भी गाड़ियों के डॉक्टर बनोगे और जो भी बनोगे कमाल बनोगे और हमें प्राउड पेरेंट्स बनाओगे ऐसा मुझे यक़ीन हैं । अब भला तुम्हारे नौवें बर्थ्डे पर यह सब लिखने की क्या ज़रूरत तो आइ यह सिर्फ़ तुम्हारे लिये नही सबके लिये अचरज का विषय हो सकता है ।

अमूमन मैं बीमार नही होती लेकिन पिछले दिनों मैं कुछ ज़्यादा गंभीर रूप से बीमार हो गई और अंतस तक डर गई । तुम सोचोगे इतनी छोटी बीमारी में मैं डर क्यूँ गई दरअसल मैंने इतनी बीमारियाँ और उससे होने वाली मौतें देखी है कि मेरे ज़हन में बीमारी से होने वाली मौत का डर Switezerland की पहाड़ियों में जमी हुई बर्फ़ की तरह जमी हुई है जो किसी भी मौसम में नही पिघलती ।

कई बार तुमने हग करके कहा मम आप ठीक हो जाओगे और शायद इसलिये ही मैं ठीक हो रही हूँ । मैं शायद इस दुनिया की पहली स्त्री हूँ जो जल्द से जल्द बूढ़ी होना चाहती हूँ, मैं उम्र की सलावटों से नही घबराती, मैं तो तुम्हारे चेहरे पर उगी हुई दाढ़ी मूँछों की रौनक़ देखना चाहती हूँ । मेरे बेटे,मेरी जान दरअसल मैं तुम्हें बड़ा होते देखना चाहती हूँ यह मेरी अंतिम इक्षा हो सकती हैं ।

यह जानते हुए भी कि तुम हिंदी नही पढ़ सकते मेरा हिंदी में लिखना तुम्हें weird लग सकता है लेकिन मैंने पढ़ाई के दौरान अपने इंग्लिश लेक्चरर से सुना था “दिल की बात हिंदी में “ इसलिये हिंदी में लिखा । अब जबकि मैं बिलकुल ठीक हूँ तब यह पत्र मैं ख़ुद तुम्हें पढ़कर सुनाऊँगी ! हालाँकि मैं नही भी रहूँ तब भी यह पत्र ब्रह्मांड में कहीं ना कहीं, किसी न किसी संचार के तार में उलझा रहेगा ।

तुम्हारी मां
प्रियंका ओम

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