मैं तुम्हारे सारे ई- खतों को डिलिट कर जख्मों को खुली हवा देना चाहती हूं

डिअर अजनबी.
मुझे आज भी इस बात का अहसास है कि तुम्हारे दिल में मैं एक कसक बन के आज भी ठहरी हूं। तुम मेरा हाथ तो छोड़ सकते हो लेकिन मेरी यादों को नहीं। आज कई दिनों से तुम मुझे भी बेसबब याद आ रहे हो जबकि अब मैं तुम्हे याद नहीं करना चाहती। तुमसे वादा जो किया था कि जब तुम मेरे खतों का उत्तर देना बंद कर दोगे तो मैं भी लिखना बंद कर दूंगी और तुम्हारे रास्ते से पीछे हट जाउंगी l

आज तुम्हारे सारे इ-खतों को डिलीट कर रही हूं क्योंकि ये मेरे गहरे ज़ख्म हैं इन्हें हटाकर इन ज़ख्मो को खुली हवा देना चाहती हूं, शायद नासूर न बन जाय इस डर से। जो लड़की किसी ‘डर’ जैसे शब्द को जानती ही नहीं थी।

तुमने बखूबी परिचय करवा दिया अहसान मंद हूं मैं तुम्हारी।  कई बरस बीत गये पर दिल आज भी इसी धोखे में जीना चाहता है और दिल मेरा बहुत कमज़ोर ..तुम तो ये बात अच्छी तरह जानते हो। मैं अब ये भी जान गयी हूं कि तुमने मेरी भावनाओं का खूब इस्तेमाल किया और मैं नासमझ समय रहते समझ न सकी।

अब जब समझ सकी तो बहुत देर हो चुकी है। नफरत हो गयी मुझे खुद से। अपनी वफाओं से जो मैंने तुमसे की थी। नफरत हो गयी अपने उन ख्यालों से जिन्हें शब्दों के लावों में ढालकर मैं बेफिक्री में सफ़ेद कागज पर उड़ेल जाती थी। नहीं जानती थी कि एक दिन इन्ही लावों की आंधी मुझे ही झुलसा देगी।

मैं ये भी जानती हूं कि तुम सब कुछ जानते हुए भी बेखयाली के सतरंगी आकाश में अपने उड़ान को हवा दे रहे होगे। अब तो उम्मीद की कोई भी आस नहीं रही और गमो और अवसाद के दरिया में नहाने के बाद जो निखरी जिंदगी हाथ लग रही है।  उसे फिर से जीना चाहती हूं और बिना कुछ कहे मैं अपने राह को मोड़ना चाहती हूं जो अब तुम तक कभी न पहुच सके sorry उन सभी बातों के लिए जो जाने अनजाने तुम्हे तकलीफ दिए हों..मैं तो तुम्हारे दिए उन तकलीफदेह जज्बात तोहफोंश्वेता मिश्रा की रईस हूं।

..संभाल के रखा है अपनी यादों की तिजोरी में। और ये भी जानती हूं एक न एक दिन तुम मुझे ढूढते हुए आओगे और ये ख़त पढोगे जो मैंने तुम्हे कभी भेजा ही नहीं …और अजनबी कहने का मतलब भी समझ ही जाओगे तुम्हे मैं समझ न सकी और अब तुम मुझे शायद समझ न पाओ तो तुम्हारी नज़रों में मैं प्यारे नही अजनबी बन के रह जाउंगी और शायद यही हमारी कहानी का अंजाम …या यूं कहूं किसी जन्म का क़र्ज़ जो मैंने चुकता कर दिया l तुम आबाद रहना अपनी दुनिया में मैं कोशिश जारी रखूंगी खुश रहने की आने वाली जिंदगी में …..


यह खत श्वेता मिश्रा ने लिखा है। श्वेता नाइजीरिया में रहती हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं और कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं।

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