प्रिय गुरुजी- आपकी सादगी, सरलता और कर्तव्यनिष्ठता को मेरा प्रणाम

प्रिय गुरुजी
सादर प्रणाम
आपके दर्शन, दुर्लभ हो गए।
जब होते हैं आपका अपना वक्त अपना नहीं होता।
संगठन और समाज को समर्पित होता है पूरा वक्त।
सालों से यह चल रहा है।

आपने पूरा जीवन संगठन और समाज को समर्पित कर दिया। यह देखकर अच्छा लगता है। आप जैसे कर्मठ, ईमानदार, जुझारू मां भारती के सेवन राजनीति में हैं। यह बेहद खुशी की बात है।

मैं सालों से आपको देख रहा हूं। उस वक्त से जब आप प्रचारक की भूमिका में थे और मैं छात्र। आपके माथे का तेज तब भी वैसा ही था जैसा अब है। वो ही हंसी और वैसा ही मिजाज। मोटरसाइकिल पर आपके साथ पीछे बैठने वाले दिन, मेरे जेहन में वैसे ही ताजा हैं। एक ही कटोरे में खाए चने और आपका झक्क सफेद कुर्ता-पैजामा। माथे का तिलक जो तब भी वैसा ही था और अब भी वैसा ही तेजोमय है। कई बार सोचता हूं आपसे खूब बातें की जाए लेकिन यह बातें हों कैसे?

अजेय कुमार

युवावस्था में जब लड़के अपने भविष्य को लेकर आशंकित होते हैं। आप झोला पकड़कर, घर -परिवार छोड़कर समाजसेवा में निकल गए। प्रचारक के तौर पर अपनी जवानी राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के नाम कर दी। संभवत: आपकी उम्र के कम ही युवा उस वक्त ऐसा कदम उठाते थे। लेकिन आपने तो बचपन से ही ठान लिया था- करनी है तो बस मां भारती की सेवा। विभाग संभाला, प्रांत संभाला और फिर अपनी मेहनत और कर्मठ व्यक्तित्व के चलते संघ से पार्टी में आए। युवाओं के प्रेरणास्त्रोत रहे और आज भी हैं। यह आपका सरल और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व ही है कि जो भी आपसे मिलता है- इतना प्रभावित हो जाता है कि आजीवन उस मुलाकात को याद रखता है।

खैर, यह सब बातें कभी और मैं तो बस आपको आपकी स्मृतियों में ले जाना चाहता हूं। उन स्मृतियों में जहां आपका बचपन और युवावस्था हों। युवावस्था के वो साथी हों जो लड़े, झगड़े और प्यार से मिले हों। उन स्मृतियों में जो आपके भीतर ताजा तो हैं लेकिन धुंधला गए हैं। लेकिन यह तभी संभव होगा जब हमारे पास वक्त होगा। मेरा भी हाल कुछ ऐसा ही है, वक्त ही नहीं है।

यह चिट्ठी उस वक्त के नाम जो ढेर सारी बातों के लिए निकल आए।
आपका
शिष्य


यह खत भारतीय जनता पार्टी के संगठन महामंत्री (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) अजेय कुमार जी के नाम लिखा गया है। ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *