घंटी का पत्र हथौड़े के नाम- तुम्हारे बिना मेरा मायना ही खत्म हो जाता

प्रियतम हथ्थे,
                 इस बार की गर्मियों की छुट्टियां बेहद लम्बी लग रही है. तुमकों स्कूल वालों ने हेडमास्टर के कमरे में बंद कर दिया है. तुम्हारे बिना मेरा मायना ही खत्म हो जाता है. तुमने तो देखी ही है हमारी ताकत. हमारी एक आवाज से पूरा स्कूल कदमताल करने लगता है. हमारे इशारों पर प्रधानाचार्य, अध्यापक और बच्चे अपना नाच करने लग जाते हैं.

मुझे इन नजारों को देखकर हमारी ताकत पर गर्व होता है.  तुझे याद है ना जब हमें पता चला था कि स्कूल में केवल फिसड्डी बच्चे ही हैं जो हमारी ताकत को चुनौती देते हैं. हमें बहुत दुख हुआ था. फिर हमने खुद को समझा लिया था कि फिसड्डियों ने चुनौती हमें नहीं, खुद को दी हैं. लेकिन इस बार मुझे सब कुछ सुनसान लग रहा है.

 

 

 

 

 

और सुनने में आया है कि घंटी और हथौड़े की ताकत को भी खत्म किया जा रहा है. पूरे देश की ऩई शिक्षा नीति के मसौदे में विषयवार पढ़ाई को खत्म करने की योजना बनाई जा रही है. अगर स्कूल में पढ़ाई  गणित, हिन्दी, अंग्रेजी, विज्ञान, कला आदी विषयों में नहीं होगी तो हमारा अस्तित्व भी खत्म हो जायेगा.

खैर अनेक बाते हैं जो तुझसे करनी है. बस अब इंतजार है कि छुट्टियां जल्दी से बीत जाए. और हम पूरे स्कूल में अपनी हुकूमत चला पाए. 

अविलम्ब तेरे इंतजार में,
घंटी.


यह चिट्ठी महेश पोखरिया ने लिखी है। वह गैर-सरकारी संस्था के साथ मिलकर उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हैं।

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