काकड़ीघाट: जहां पीपल वृक्ष के नीचे स्वामी विवेकानंद को प्राप्त हुआ ज्ञान

यह काकड़ीघाट का वही पीपल वृक्ष है, जहां स्वामी विवेकानंद जी को 1890 में ज्ञान की…

वियना की यात्रा: हर शहर में कुछ न कुछ छोड़ आना चाहिए

यात्राएं बहुत कीं, पर लिखने की उमंग ने कभी ज़ोर नहीं मारा। पिछले वर्ष जब लिस्बन…

मणिपुर, यही भी एक अनूठा देश है

यात्राएं जीवन का अनूठा अनुभव देती हैं। उन यात्राओं का अनुभव अलहदा होता है जिन यात्राओं…

ओह! मेरी नोआ आखिर तुमने ऐसा क्यों किया…?

प्यारी नोआ ये ख़त तुम्हारे और उन लड़कियों के नाम जो जीवन से हार कर मृत्यु…

प्यारी सखी! मैं भी तुम्हारी तरह एक आम मां हूं

प्यारी सखी पहले तो माफ़ी क्योंकि ये दोस्ती के उसूलों के खिलाफ है कि दो दोस्तों…

बिछुड़े मित्र को एक ख़त

पुराने कागजों में आज यह आधा-अधूरा पत्र मिल गया – इसे कभी पूरा करके, परिचित के…

बेटी आसिफा-दुआ करता हूं, तुम्हारी रूह जहां हो मुकम्मल चैनो आराम से हो

बेटी आसिफा, दुआ करता हूँ कि तुम्हारी रूह जहाँ भी हो मुकम्मल चैनो आराम से हो।…

‘अगर हमारी शादी हो गई होती तो मैं कुछ नहीं होती, मर गई होती’

डियर… तुम्हारे लिये कोई उपयुक्त सम्बोधन नही मिला इसलिये जगह ख़ाली छोड़ दी। तुम्हें मेरे लिये…

‘संस्कृति’ आत्मा और वैदिक धर्म ‘पथ प्रदर्शक’ है

आत्मीय युवाशक्ति यह पत्र आपको समर्पित है। आप ही भारतीय संस्कृति, सभ्यता, वैदिक साहित्य एवं दर्शन…

हम सपने क्यों देखते हैं, संजय के साथ सपनों की बात