पुरुषों के प्रति मेरे अविश्वास को विश्वास प्रदान किया तुमने

मेरे प्रिय (Priya Rana Love Letter)
       बात यहां ख़तोकिताबत की नहीं है, विकल्प की है, क्योंकि प्रत्यक्ष रूप से तुम्हारे प्रति अपने विचारों को मैं आज तक सही रूप दे ही नहीं पाई। इसलिए आज विकल्प के रूप में ख़त का हाथ पकड़ना पड़ा‌। संभवतः यह मेरे विचारों को सही दिशा देने में मददगार साबित होगा। (Love Letters)

मैंने बहुत लंबा जीवन तो नहीं जिया है, परन्तु इस जीवन के बत्तीस वसंत देखने के उपरांत प्रेम और स्नेह की निस्वार्थ बरखा तथा स्वार्थ से पूर्ण कलुषित बारिश में अंतर करना सीख गई हूं। मेरे बत्तीस साल के मेरे अनुभवों को निचोड़ने के बाद मैंने तुम्हारा चयन किया है। हमेशा स्त्री-विषयक विषयों पर चर्चा-परिचर्चा करने वाली, समाज में पितृसत्ता के मक्खन में लिपटे पुरुषों को आड़े हाथ लेने वाली मैं स्वयं, तुम्हारे मेरे जीवन में चमत्कारिक आगमन से अचम्भित हूँ, हालांकि एक स्त्री लेखिका होने के नाते मैं सभी पुरुषों को सही नहीं कहती।

 


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परन्तु, जीवन को लेकर तुम्हारे सकारात्मक दृष्टिकोण ने मुझे कई जगह गलत साबित किया और यकीनन बड़ी ही ईमानदारी से अपने गलत होने को सहर्ष स्वीकार करती हूं। जीवन से जो कुछ भी तुमने सीखा, वह अतुलनीय हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि, पुरुषों के प्रति मेरे अविश्वास को विश्वास प्रदान किया है तुमने। मेरे जीवनसाथी को लेकर मैंने जो कल्पना की थी, उसकी प्राप्ति में मुझे सदैव संदेह ही था। कर्मों पर हमेशा विश्वास करने वाली मैं, आज अपने भाग्य के प्रति बड़ी आभारी हूँ ।

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मुझे मेरे विगत जीवन के दंशों से केवल तुम्हारे जैसा व्यक्तित्व ही उबार सकता था। तुम्हारा स्वार्थहीन प्रेम व स्नेह तथा सबसे अधिक महत्वपूर्ण तुम्हारा मुझ पर, मेरी कर्मठता और कर्मशीलता पर अटूट विश्वास मेरे उज्जवल भविष्य की ओर एक पक्की सड़क का निर्माण करता है, जिस पर बिना डगमगाए हुये मैं, अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकती हूं।

अगर मैं, तुम्हें मेरे जीवन की धुरी कहने या मानने लगूं, तो यकीनन इसमें न तो कोई जल्दबाजी है न ही किसी प्रकार का संदेह। तुम्हारे प्रति मेरा ये विश्वास एक दिन की उपज नहीं है। बल्कि मेरे अब तक के बिताये हुये जीवन का सार है। हमारे इस रिश्ते की नींव उसी दिन रख दी थी तुमने जिस दिन थमा दिया था प्यार और विश्वास मुझे और मैंने भी तुम्हें।

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बस यहीं से शुरू हुआ ये सफ़र और यकीन मानों जीवन के इस लम्बे सफ़र में धूप-छाँव जरुर आयेगें, लेकिन तुम्हें थकावट कभी महसूस नहीं होने दूंगी। मैं तुम्हारे लिये चाँद-तारे तोड़ने की बात तो नहीं करुँगी, लेकिन मेरे जीवन में जुटाई गई हर एक चीज पर तुम्हारा बराबर का अधिकार होगा, फिर चाहे वह दुनियाँ के मुँह से की गई मेरी प्रशंसा ही क्यों न हो, उसमें तुम जरुर शामिल होगे, क्योंकि पहले मैं स्वयं से थी, लेकिन आज तुमसे मेरा होना अच्छा लग रहा है।

कहते हैं कि हर आदमी की सफलता के पीछे एक औरत का हाथ होता है, लेकिन यहाँ हम एक साथ सफलता की सीढ़ियां चढ़ेंगे एक-दूसरे का हाथ थामे। मुझे विश्वास है कि ऐसा ही होगा। हम दोनों दुनिया के लिए मिसाल बने न बने, परन्तु अपने घर-परिवार को एक आदर्श दे जायें, मुझे ये ही पर्याप्त है। तुम्हारे व्यक्तित्व की पारदर्शिता ने हमेशा ही तुम्हारे प्रति मेरे आकर्षण को बढ़ाया है।

कहीं भी दूर-दूर तक कोई दुराव-छिपाव नहीं तुममें। तुम्हारे इस व्यक्तित्व के प्रति मेरी मोहना ऐसी ही बनी रहे बस यही ईश्वर से कामना है मेरी। तो आओ निकलते हैं मिलकर इस नए सफ़र पर एक साथ यूं ही ।
तुम्हारी
प्रिया


प्रिया राणा लेखिका हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख, कहानी और कविताएं प्रकाशित।
संपर्क- priyarana1504@gmail.com

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