पढ़ें प्रेरणा मिश्रा की 4 कविताएं- ‘अगाध प्रेम’ से लेकर ‘आंसू’ तक

प्रेरणा मिश्रा

1- अगाध प्रेम

काश महसूस कर सको,
तुम मेरे अगाध प्रेम को,
जो मैं केवल तुमसे करती हूँ,
जिसमें अंश मात्र भी छल नहीं,
ना है कामना का वास,
ना द्वैष की भावना,
ना विवशता,
ना ही भौतिकता,
बस है तो पूर्ण विश्वास,
मिलन का,
समर्पण का,
भाव का,
सुख दुःख के साथी का,
तुम्हारी मुस्कुराहट का,
तथा
मेरे अगाध प्रेम का।
~ प्रेरणा मिश्रा

2-परछाई कहीं खो आये हो

सुना है,
बर्बादियों के मंज़र से बच आए हो
गलतफहमी में हो
या कहीं से तसल्ली लेकर आए हो,
चार दीवारों के बीच भी
तुम सबसे मिल आए हो
पर लगता है
अपनी ही परछाई कहीं खो आए हो,

सुना है,
बड़ी दूर से आए हो,
सच में आए हो
या उसी गली में अपना दिल छोड़ आए हो,

सुना है,
एक नए शहर के तलाश में गए थे तुम,
शहर ने ठुकरा दिया
या अपने मन से आए हो,

सुना है
बहुत खूबसूरत है शहर
फिर क्या हुआ जो सब गांव लौट आए हो??

3-आंसू
बहुत तकलीफ़ देते हैं वो आंसू
जो आंखों से वापिस चले जाते हैं,
बहुत तकलीफ़ होती हैं
जब कहने को दिल में हज़ार बात हो
और अल्फ़ाज़ खत्म हो जाते हैं,
कह देती हूं पूरे दुनिया से आज
कोई फर्क नहीं पड़ता उनके आने न आने से,
मगर धड़कने वहीं थम जाती है जब कभी देख लूं तुझे किसी बहाने से,
न जाने कैसे तुम मेरे रूह में बसे हो
न जाने कैसे तुम मेरे रूह में बसे हो
आज भूलती हूं कल फिर याद आ जाते हो
कल फिर याद आ जाते हो।

4-प्रेरणा हूं मैं
मैं कोई वस्तु नहीं,
जिसे ना छुने से उसपर धूल पड़ जाए,
ना ही किसी के छुने से मैं मैली हो जांऊ,
नीर हूँ मैं,
बहती हुई कहीं भी चल जाऊ,
आसमान कि ऊचांई हूँ मैं,
समंदर कि गहराई हूँ मैं,
आँखोँ का काजल हूँ मैं,
ज्वाला की खाई हूँ मैं,
तपती धूप कि छाया हूँ मैं,
कोयले सी काया हूँ मैं,
चाँद कि वो दाग हूँ मैं,
सूरज कि ताप हूँ मैं,
कुछ दूर तुमसे,
कुछ खुद के करीब…आयी हूँ मैं,

मैं कोई वस्तु नहीं,
मुस्काती,
चंचल सी,
उदंड,
प्रेरणा हूँ मैं

(प्रेरणा मिश्रा दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए कर रही हैं। कविताएं लिखने का शौक है।)

3 thoughts on “पढ़ें प्रेरणा मिश्रा की 4 कविताएं- ‘अगाध प्रेम’ से लेकर ‘आंसू’ तक

  1. These are one of the most beautiful poems I have ever read till now. For sure they are going into my all time favourite diary

    इन कविताओं को जितना सराहा जाए उतना कम है अद्भुत प्रतिभा है आपमें

  2. वाह, आपकी सभी रचनाएं ही उम्दा है। मगर ‘परछाई कहीं खो आए हो’ का एक साथ दो भाव प्रतीकात्मक रुप में लेकर चलना साथ ही हृदय से क्षण भर तारतम्य न टूटना आपके हृदय और बुद्धि का अद्वितीय सामंजस्य प्रस्तुत कर रही है। वर्तमान के लिए बधाईयां 🌻 भविष्य के लिए शुभकामनाएं।✨💐💐

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