मातृवंशात्मक समाज में स्त्री

सभ्यता के आरंभिक इतिहास से यह ज्ञात होता है कि मानव समाज गुफाओं और कंदराओं में…

पुराना जूता और इलाहाबाद स्टेशन- वकील के साथ मेरा किस्सा

मैं बेरोजगार था। अचानक एक दिन इलाहाबाद से फोन आया। नंबर सेव नहीं था। किसी भी…

ख्याली पुलाव- वो तुम नहीं मेरी कहानी थी

‘इश्क पहले आंखों  में उतरता है फिर दिल में बस जाता है। आंखें प्यार का कैमरा…

हिंदी दिवस विशेष: अपने ही देश में हिंदी की स्थिति को देखकर दुख होता है

भावना मासीवाल जेंडर और स्त्री मुद्दों पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और वेबसाइट्स के लिए लगातार लिखती हैं।…

हिंदी दिवस विशेष: हिंदी को बाजार नहीं, ज्ञान की भाषा के रूप में देखें

प्रकाश उप्रेती दिल्ली यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और वेबसाइट्स पर समसामयिक मुद्दों पर…

शिक्षक दिवस: अब गुरु का नहीं, शिष्य का जमाना है

आज शिक्षक दिवस है। बचपन से ही इस दिन का अलग ही उत्साह रहता था। रंग…

व्यंग्य: ऊंची नाक का सवाल

इस दौर में जब देश में बाढ़ का प्रकोप है तो नाक से सांस लेने वाले…

ओमप्रकाश वाल्मीकि : न्याय की घोषणा के कवि

दुनिया में ऐसे बहुत-कम लोग जन्म लेते हैं जिन्हें तारीख़ उनके द्वारा किए गए सामाजिक, सांस्कृतिक…

वामपंथी दादा का निराला चेला: पर्दा उठ रहा है बिना भावनाएं आहत किए पढ़ें

यह संवाद वामपंथी दादा और उनके नए नवेले शिष्य के बीच उस वक्त चल रहा है…

शुबि दाधीच की कहानी- ‘क्रिसमस की वो रात’

उस दिन मुझे याद हैं – एक प्यारा- सा तोहफा जो मुझे क्रिसमस पर मिला था…