निधि उछोली की कहानी: माया और प्रेम

जुलाई का महीना था। शाम के चार बज रहे थे। बाहर उमस थी। आसमान बादलों से…

लघु कहानी- हिलमणी का रेडियो

वॉइस कमांड के इस युग में हिलमणी होते तो बेटे का लाया रेडियो कभी नहीं तोड़ते।…

डॉ कुसुम जोशी की लघुकथा: ठुल कुड़ी

फिर उसने आमा से चिरौरी की “ठुल कुड़ी” दिखा दो आमा.. परसों कॉलेज खुल जायेगा और…

लघुकथा- अजनबी आंगन

नवल ददा अपनी नवेली ब्योली को लेकर अभी अभी घर पहुंचे थे। बाबा, बाबू ,ताऊजी चाचा,…

प्रेम और प्रतीक्षा -क्या मठ में होना वैसा ही है जैसा एक मत में होना?

  भंते! क्या तुम्हारा और मेरा संघ में होना, एक जैसा है ? क्या साधु और…

मातृवंशात्मक समाज में स्त्री

सभ्यता के आरंभिक इतिहास से यह ज्ञात होता है कि मानव समाज गुफाओं और कंदराओं में…

पुराना जूता और इलाहाबाद स्टेशन- वकील के साथ मेरा किस्सा

मैं बेरोजगार था। अचानक एक दिन इलाहाबाद से फोन आया। नंबर सेव नहीं था। किसी भी…

ख्याली पुलाव- वो तुम नहीं मेरी कहानी थी

‘इश्क पहले आंखों  में उतरता है फिर दिल में बस जाता है। आंखें प्यार का कैमरा…

हिंदी दिवस विशेष: अपने ही देश में हिंदी की स्थिति को देखकर दुख होता है

भावना मासीवाल जेंडर और स्त्री मुद्दों पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और वेबसाइट्स के लिए लगातार लिखती हैं।…

हिंदी दिवस विशेष: हिंदी को बाजार नहीं, ज्ञान की भाषा के रूप में देखें

प्रकाश उप्रेती दिल्ली यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और वेबसाइट्स पर समसामयिक मुद्दों पर…