धोती अब इस देश को नहीं भाती, आखिर क्यों? 

इसे देश की विडंबना न कहा जाए तो क्या कहा जाए कि धोती पहने एक बुजुर्ग का ट्रेन से उतार दिया जाता है और रेलवे अभी तक इस मामले में चुप्पी साधे हुए है। क्या इस देश में धोती और चप्पल पहनना इतना बड़ा गुनाह हो गया। यह वही धोती है जिसे गांधी ने आजीवन अपने शरीर पर लपेटे रखा। इसी धोती को पहनकर महाराष्ट्र के अन्ना 21वीं सदी के गांधी बन जाते हैं लेकिन जब इसी धोती को धारण कर रामअवध दास ट्रेन में चढ़ते हैं तो उन्हें ट्रेन से उतार दिया जाता है।

आखिर क्यों?
इस देश की 29 फीसदी से ज्यादा आबादी गांवों में बसती है। देश की वित्त मंत्री बजट पेश करते हुए गांव, गरीब और किसान की बात कहती हैं। रेलवे के आधुनिकरण की बात करती हैं लेकिन किसे पता था कि अंग्रेजो की देन ट्रेन 21 वीं सदी में धोती के खिलाफ हो जाएगी।

राष्ट्रपिता गांधी की तरह धोती पहनना क्या इस देश में गुनाह हो गया है। धोती को शरीर पर लपेटने और पैर में रबर के चप्पल पहनने की वजह से बुजुर्ग को ट्रेन से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है और देश में चुप्पी है। यह घटना सुनने में मामूली लग सकती है लेकिन यह भारतीय ग्रामीण समाज, धोती और रबर के चप्पलों के प्रति एक अभिजात्य मानसिकता है जो गरीब को किसी कीड़े-मकोड़े से कम नहीं समझती। घटना को दो दिन बीत गए और किसी भी बड़े नेता का इसे लेकर कोई बयान नहीं आया। यह हमारे संवेदनाओं के मर जाना का जीता-जागता सबूत है।

धोती धारण कर संसद की दहलीज पर कदम रखने वाले नेता आखिर क्यों इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। क्या रामअवध दास की धोती और नेताओं की धोती में फर्क है। घटना 4 जुलाई की है। रामअवध दास को शताब्दी एक्सप्रेस में नहीं बैठने दिया और रेलवे अभी तक इस मामले में अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है। जांच के आदेश दिए लेकिन अभी तक टीटीई के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। आखिर क्यों? क्या 21 सदी में इस देश में वेशभूषा और पहनावे के आधार पर भेदभाव होगा? मामले की लापापोती में जुटे अधिकारियों का कहना है कि बुजुर्ग गलत कोच में चढ़ रहे थे। उन्हें सही कोच में भेजा गया था, उतारा नहीं गया था।

मामला उत्तर प्रदेश के इटावा का है। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी धोती धारण करते हैं। क्या भगवा धोती और सफेद धोती में फर्क है? रेलवे और सूबे की सरकार को शर्म आनी चाहिए 72 साल का बुजुर्ग जो जिसने इस देश के बदलाव की एक पूरी लंबी कहानी देखी इसी देश में धोती और चप्पल की वजह से ट्रेन से उतार दिया जाता है।

ललित फुलारा

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