वरिष्ठ जनों और मुख्य अतिथियों की उपस्थिति में ACE ASPIRE पुस्तकालय का उद्घाटन

नोएडा एक्सटेंशन के एस एस्पायर सोसायटी में रविवार को लघु पुस्तकालय का उद्घाटन हुआ। सोसायटी के वरिष्ठ जनों, युवाओं और महिलाओं की उपस्थिति में विधिवत सरस्वती पूजन के जरिए पुस्तकालय को सोसायटी के निवासियों के लिए खोला गया। हिंदी और अंग्रेजी की ढ़ाई सौ से ज्यादा किताबों के जरिए सोसायटी में पुस्तकालय की नींव पड़ी और अन्य सोसायटी के निवासियों को भी अपने-अपने यहां पुस्तकालय खोलने का संदेश दिया गया। सोसायटी के निवासियों के साथ ही अन्य मुख्य अतिथियों की मौजूदगी में सामूहिक विमर्श के जरिए पुस्तकों के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

मंच का संचालन करते हुए अमर उजाला के वरिष्ठ उप संपादक ललित फुलारा ने कहा कि पुस्तकों के जरिए ही हम एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं। पुस्तकें, उसी तरह से हैं, जैसे हमारे घर के बुजुर्ग। जिस तरह से घर के बुजुर्गों की छांव में हमें सबल मिलता है और हमारा चारित्रिक विकास होता है, उसी तरह से पुस्तकों के जरिए हमारा समग्र विकास होता है।  हमारे भीतर रचनात्मक कौशल की वृद्धि होती है और बौद्धिक समाज का निर्माण होता है।

डिजिटलाइजेशन के इस दौर में जहां  पुस्तकों से हमारी दूरी बढ़ रही है, ऐसे वक्त में नोएडा एक्सटेंशन की एकमात्र सोसायटी ‘एस एस्पायर’ में पुस्तकालय का यह उद्घाटन सुखद अनुभूति देता है। उम्मीद है कि भविष्य में पुस्तकालय का यह मूवमेंट सभी सोसायटी तक पहुंचें और वहां भी इंसान की सबसे प्रिय मित्र पुस्तकों के लिए एक ऐसा कोना बनें, जहां बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग व युवा सभी पठन-पाठन, मनन-चिंतन और विमर्श के  जरिए सकारात्मक संवाद कर सकें।

पुस्तकालय के इस निर्माण में सोसायटी में रहने वाले उत्तराखंडी समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उत्तराखंडी युवाओं के समूह के सार्थक प्रयास ने पुस्तकालय के इस सपने को साकार किया। उत्तराखंड के वरिष्ठ जनों के मार्गदर्शन और सुझाव के जरिए पुस्तकालय के सपने को धरातल पर उतारा गया। उत्तराखंड एकता समूह की तरफ से शुरु हुए इस पुस्तकालय को सोसायटी के सभी प्रबुद्ध जनों का भरपूर समर्थन मिला और भविष्य में लघु पुस्तकालय से एक बहुत बड़े पुस्तकालय को बनाने का आश्वसान भी सोसायटी के प्रबुद्ध लोगों की तरफ से दिया गया।

इस मौके पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सूर्य प्रकाश ने कहा कि पुस्तकालय में बैठकर पुस्तकों को पढ़ने का जो आनंद है, वो आनंद आधुनिक ई- पुस्तकालयों के जरिए कभी नहीं लाया जा सकता। बिल्डरों ने एक्सटेंशन में गगनचुंबी ईमारतें, तो बना दी लेकिन वहां रहने वाले निवासियों के चरित्र निर्माण और बौद्धिक विकास के लिए सबसे जरूरी चीज पुस्तकालय ही छोड़ दिया। हर सोसायटी में एक कोना अनिवार्य रूप से पुस्तकालय के लिए समर्पित होना चाहिए। जिस तरह से आधुनिक क्लब हाउस और स्वीमिंग पुल बनाए गए हैं, उस तरह से पुस्तकालय क्यों नहीं बन सकते?  सोसायटी में रहने वाले बच्चों के रचनात्मक और बौद्धिक विकास के लिए पुस्तकालय से बेहतर और क्या चीज हो सकती है। कार्यक्रम में सोसायटी में रहने वाले कई वरिष्ठ जनों ने पुस्तकों को लेकर अपने-अपने विचार रखें और पुस्तकालय निर्माण के इस कार्य को जमकर सराहा।

सबसे खास बात रही कि मंच पर आसीन मुख्य अतिथियों सूर्य प्रकाश (प्रोफेसर एमसीयू), भाग प्रचारक आरएसएस विवेक, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से दीक्षांत सूर्यवंशी व अनुज की उपस्थिति में सोसायटी के सभी वरिष्ठ जनों ने एकसाथ फीता काटकर बेहद अनौपचारिकता से पुस्तकालय का उद्घाटन किया और उसे सोसायटी के सभी वरिष्ठ नागरिकों को समर्पित किया और यह निवेदन भी किया कि आने वाले वक्त में सोसायटी के वरिष्ठ जन अखबार, पत्रिकाओं व पुस्तकों के साथ सामूहिक विमर्श के लिए पुस्तकालय के इस कोने को जरूर चुनें।

पुस्तकालय के इस उद्घाटन के मौके पर सोसायटी के ही निवासी आशीष मिश्रा के सुपुत्र आर्चीमन मिश्रा ने अपनी मधुर आवाज में सरस्वती वंदन के जरिए सबको मंत्रमुग्ध किया और दो गीतों व वंदना के जरिए मां सरस्वती की स्तुती की और अपने उद्बोधन में स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण का जिक्र किया।

पुस्तकालय के इस उद्घाटन कार्यक्रम में गोपाल सिंह बिष्ट, केसी नैनवाल, डीपीएस बिष्ट, सोहन नेगी, लीलाधर फुलारा,  विवेक जोशी, हेमंत गैरोला, जयंत गैरोला, दीपक फुलारा, प्रतीक, चीनू, आरके मेहता, सागर सरकार, नरेश कुमार, आशीष मिश्रा, मुकेश, सुधीर श्रीवास्तव, कुलदीप, भाटी जी, बसंती फुलारा, मोहनी गैरोला, मंजू चंदोला, मंजू नेगी, विमला बिष्ट के साथ ही सोसायटी के अन्य प्रबुद्ध जनों ने अपनी गरिमापूर्ण उपस्थिति दर्ज की।  इसके साथ ही अन्य सोसायटी से पंकज दूबे मौजूद रहे जिन्होंने अपने सोसायटी में भी पुस्तकालय निर्माण का वचन दिया और इस कार्य को सराहा।