कोरोना काल: मैं- कमरूद्दीन के आम, हनुमान मंदिर, कुल्फ़ी, पान व भुट्टे वाला

जब मैं यह लिख रहा हूं.. जुलाई बीतने वाली है। फुटपाथ, सड़कें, गली-मोहल्ले कोरोना से निर्भय…

‘समय की नाक’ से लेकर ‘कहानियों के पैर नहीं होते’ तक डॉ. हरेंद्र असवाल की कुछ चुनिंदा कविताएं

         (1 ) समय की नाक नाक छोटी और विजन बड़ा रखने का…

मैं कोई धर्म बनाता तो ईश्वर को ‘पापा’ बनाता और खुद ‘बेटी’ होता

अंदर तक वादेसवा की तरह कोई सकूनी लफ़्ज मुझे लगता है तो वह है ‘पापा’। ऐसा…

उथल-पुथल से भरे मन के आवेग को शिथिल कर अवसाद की काई को हरिता में बदलती किताब

फ़िल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद सोशल मीडिया पर अवसाद को लेकर काफी…

लघु कहानी- हिलमणी का रेडियो

वॉइस कमांड के इस युग में हिलमणी होते तो बेटे का लाया रेडियो कभी नहीं तोड़ते।…

डॉ कुसुम जोशी की लघुकथा: ठुल कुड़ी

फिर उसने आमा से चिरौरी की “ठुल कुड़ी” दिखा दो आमा.. परसों कॉलेज खुल जायेगा और…

इस लेख से समझिए कोरोना, जैव विविधता और पर्यावरण

डॉ वीर सिंह कोरोना काल में अनेक ऐसे चित्र उभर कर सामने आएं हैं जो दर्शाते…

लघुकथा- अजनबी आंगन

नवल ददा अपनी नवेली ब्योली को लेकर अभी अभी घर पहुंचे थे। बाबा, बाबू ,ताऊजी चाचा,…

सहजीवन में प्रकृति या प्रकृति में सह जीवन:  हिमालय से कुछ अनुभव

मैं ग्लोब के जिस हिस्से में रहता हूं वो हिमालय में स्थित है। यह भूभाग हिमालय…

प्रेम और प्रतीक्षा -क्या मठ में होना वैसा ही है जैसा एक मत में होना?

  भंते! क्या तुम्हारा और मेरा संघ में होना, एक जैसा है ? क्या साधु और…