बेटी आसिफा-दुआ करता हूं, तुम्हारी रूह जहां हो मुकम्मल चैनो आराम से हो

बेटी आसिफा,
दुआ करता हूँ कि तुम्हारी रूह जहाँ भी हो मुकम्मल चैनो आराम से हो। तुम्हारे साथ जो दरिंदगी हुई उसने हम सब को शर्मसार कर दिया है । इसमे किसी भी तरह से भागीदार न होते हुए भी आज तुमसे माफी मांगने का मन हो रहा है, इसलिए कि हम तुम्हे बचा न सके। इसलिए भी कि मै एक मर्द हूँ वो भी हिन्दू मर्द जिसका हवाला अपराधी अपने बचाव के लिए दे रहे हैं। तुम्हारे जाने के बाद भी दरिंदे थमे नहीं हैं वो और बढ़ गए । उनका कांरवा 6 से बढ़कर हजारों मे पहुँच गया है। वो धर्म की खाल ओढ़कर सीना ताने अपना बचाव कर रहे हैं । उनके समर्थन मे ‘हिन्दू एकता मंच ‘ बनाया जा चुका है, नेता-मंत्री-वकील नारे और तकरीर दे रहे हैं ।

इन्होंने उस हिन्दू धर्म की आड़ ली है जिसके मुझ सहित करोड़ों अनुयायी आज तुम्हारेलिए रो रहे हैं पर उनकी कोई सुनने वाला नहीं । ऐसा लगता है कि सत्ता इन कुछ हजारों की सुन ही नही रही बल्कि इन्ही की है ।

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तुम्हें खत्म करने से पहले जो हैवानियत हुई, जिस तरह तुम्हें नशा दे-दे कर कई दिनों तक रौंदा और नोचा गया वह सब सोचकर ही कंपकंपी हो रही है । यह जघन्य काम भी उन्होंने पवित्र मंदिर मे किया जहाँ ऐसा सोचना भी पाप है । उन्होंने हमारे धर्म पर ऐसा करके दाग लगाया है । दरिंदो से घृणा और नफरत हो रही है । ऐसा अनुभव करने मे तुम्हारा परधर्मी होना और आताताइयो का हिन्दू होने से कुछ फर्क नही पड़ रहा ।आखिर इन्सानियत इनसे ऊपर है, पर यह कुछ लोगों मे खत्म कैसे हो गई है ।

मैं दो बेटियों का बाप हूँ । जानती हो उनमें से एक तुम्हारी ही उम्र यानि आठ साल की है और दूसरी महज पांच साल की । आज उनसे भी नजरें मिलाने की हिम्मत नही बची।उनके लिए मेरी चिंता और जज्बात संभाले नही संभल रहे आखिर आज तुम ही जो उनमे दिखाई दे रही हो । तुम्हारे जाने के बाद भी ए दुनिया बदली नही है बल्कि और बदतर हो गई है । एक 6 साल की बच्ची से बिहार मे फिर रेप हुआ,नहीं जानती ना कि यह क्या होता है वही जो तुम्हारी जान लेने से पहले दरिंदो ने कई दिन तुम्हारे साथ किया था उफ्फ । वही पापी जो तुम्हारे मामले मे दोषियों को बचा रहे थे, इस मामले मे न्याय के लिए उछल रहे हैं । पता है क्यों? क्योंकि इसमे दरिंदा मुस्लिम है।

वही मुस्लिम धर्म जिसका पालन तुम और तुम्हारा परिवार करते थे । इन्साफ के लिए यह सेलेक्टिव तरीके और भाव हमें कहां पहुंचा रहे हैं । बेशक अब हम गांधी -नेहरू -मौलाना आजाद और अम्बेडकर का हिन्दुस्तान नही रहे जो मोहब्बत, सम्मान और इन्साफ पर टिका हो। यहां अब जाति,धर्म, रुतबा देखकर व्यवहार हो रहा है । कब हम दरिंदे को सिर्फ दरिंदा मानेंगे हिन्दू या मुसलमान नहीं । इनका कोई धर्म मजहब हो भी नहीं सकता । वैसे लड़की होना इस देश मे गुनाह ही हो गया है , ऊपर से तुम घुमंतू बकरवाल गरीब समुदाय की थी जिनका न तो कोई सियासी रहनुमा है न ही इस तथाकथित सभ्य समाज मे स्थान । हालांकि तुम जिस मजहब को मानती थीं उसमे पुनर्जन्म की मान्यता नही है ,फिर भी मै अपने धार्मिक विश्वास और संस्कार के तहत तुमसे गुजारिश करता हूँ कि अगर अगला जन्म मिले भी तो इस देश मे मत आना, हम तुम्हारे लायक नही । तुम ईश्वर से भी लड़ जाना पर दरिंदो के इस देश मे मत आना । अब कांपते हाथ, और आँसूभरे आंख लिखने नहीं दे रहे, तुम जहां भी हो सकून से रहो ।इस दुनिया को याद मत करना दुख ही होगा ।

तुम्हारा –
एक इंसान अंकल
आलोक कुमार मिश्रा

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