मैं तुम्हें एक औरत की दूसरी औरत के प्रति जिम्मेदारी के रूप में देखती हूं

साझा सपनों को अकेला पूरा करने की ज़िद के नाम ख़त

प्रिय
चियु
क्या करूं चिया से ज्यादा चियु कहकर तुम्हें सम्बोधित करना, तुम्हारे प्रति मेरे दुलार की तुष्टि करता है। सबसे पहले तो बिना देरी किये मेरी तरफ़ से ढेरों बधाईयां, तुमको अंततः फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र में कुछ करने का अवसर मिला, जो तुम्हारा मनपसंद कार्यक्षेत्र रहा है। लेकिन ये क्या? इस उपलब्धि का श्रेय तुमने मुझे क्यों दिया?

यही कारण है कि मुझे ये पत्र लिखना पड़ा। आज यह पत्र मेरी तरफ़ से तुम्हारी मेरे प्रति भावनाओं तथा आभार का प्रत्युत्तर है। तुम्हारा मुझे बार-बार धन्यवाद कहना न केवल मेरे ऊपर एक बोझ का आवरण बना देता है अपितु तुम्हारे सपने, आकांक्षाएं तथा स्वयं से तुम्हारी अपेक्षाओं को गौण कर देता है।

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सही मायने में मुझे तुम्हारा धन्यवाद करना चाहिए और मैं करुंगी भी। तुम्हारी बी.ए. की डिग्री के बाद पांच साल का विलम्ब सच कहूं तो तुम्हारी विफलता बिलकुल नहीं है, क्योंकि इतने बड़े अंतराल में भी अपनी जिजीविषा और कुछ कर गुजरने की ललक को मरने नहीं दिया, हालांकि परिस्थितिवश तुम इतने समय मौन अवश्य रही।

किन्तु तुमको इस बात से इत्तेफाक रखना होगा चिया! तुम्हारी जगह अगर कोई और लड़की होती तो शायद, उसके कुछ कर पाने की इच्छा यह समय का अंतराल अपने साथ बहा कर ले गया होता। किन्तु तुमने अपनी इच्छाओं, अपने सपनों को खूब दूध-दही खिलाया और सही समय की प्रतीक्षा तुम करती रही।

जैसा कि मैंने अभी कहा था कि मुझे तुम्हारा धन्यवाद करना चाहिए तो चिया मेरी तरफ़ से तुम्हे स्नेहिल धन्यवाद क्योंकि बहुत ही कम समय में न केवल मुझ पर अपना विश्वास दिखाया तुमने बल्कि उस राह पर चलने का निर्णय भी लिया, जो मैंने तुम्हे दिखाई।

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हालांकि तुम तुम्हारे इस रास्ते पर अकेले ही चलो, मेरा ऐसा कहना कहीं न कहीं मुझे डराता भी था। क्योंकि इतने समय बाद तुम्हारे हाथों से कुछ भी छूटने नहीं देना चाहती थी, वही बाहरी दुनिया से तुम्हारा ज्यादा सरोकार भी नहीं रहा था। लेकिन जिस मेहनत तथा स्फूर्ति के साथ तुम अपने सपनों को पूरा करने में जुटी हो, और फिर से अच्छे कॉलेज में दाखिला पा गई हो, यकीनन मेरी ओर से बधाई की पात्र हो।


तुमने न केवल मेरा विश्वास जीता बल्कि स्वयं के प्रति मेरे विश्वास को भी पक्का किया है।
अपने सुखद भविष्य की नींव तो तुम रख ही चुकी हो। तुम्हारे सपनों के महल को मैं साक्षात देख पाऊं, मेरी यही कामना रहेगी। तुम्हारा आत्मविश्वास दिनों-दिन बढ़ता ही रहे तथा भविष्य में तुम्हारी सफलता का कारण तुम स्वयं बनोगी, कोई और नहीं, बस तुमसे इस उम्मीद की चाह रहेगी।

खत के साथ ही किस्से, कहानी और कविता।

हमारे बीच में आत्मीयता का रिश्ता जरुर जुड़ा है, वहीं दूसरी ओर मैं तुम्हें एक औरत की दूसरी औरत के प्रति जिम्मेदारी के रूप में तो देखती ही हू।, साथ में ममत्व और बहनत्व की भावनाए भी अक्सर रही ही हैं तुम्हारे प्रति। कारण तुम्हारी और मेरी उम्र का फ़ासला रहा है| लेकिन एक सम्बोधन का रिश्ता अभी भी नहीं है, मैं तुम्हें चिया कहती हूँ तो तुम केवल आप कहकर सम्बोधित करती रही हो और ऐसा कोई रिश्ता हो जरुरी भी नहीं और रिश्तों में बंध जाने का मेरा कोई उद्देश्य है भी नहीं, बस हम लोगों में यूँ ही आत्मीयता, विश्वास बना रहे |

मेरे लिए पर्याप्त है और मैं कामना करती हूँ कि एक चिया की लगन और मेहनत हजारों चिया के लिए प्रेरणा बने। तुम्हारे सपनों को आकाश मिले इसी कामना के साथ विदा लेती हूं।|


प्रिया राणा लेखिका हैं। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख, कहानी और कविताएं प्रकाशित।
संपर्क- priyarana1504@gmail.com

 

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