चिट्ठी-पत्री

मैं और कोई नहीं तुम्हारा ‘ख़त’ हूं

डियर, सभी ख़त लिखने वालों मैं और कोई नहीं तुम्हारा ‘ख़त’ हूं. शायद तुम खत लिखना भूल गए तो मैंने सोचा आज खुद तुम्हें याद कर लूं. दुनिया आगे बढ़…

इंटरव्यू

लघुकथा- अजनबी आंगन

नवल ददा अपनी नवेली ब्योली को लेकर अभी अभी घर पहुंचे थे। बाबा, बाबू ,ताऊजी चाचा, जीजाजी, फूफाजी सब बारात से लौट कर रात भर की थकान के बाद भी…

यायावरी

मणिपुर, यही भी एक अनूठा देश है

यात्राएं जीवन का अनूठा अनुभव देती हैं। उन यात्राओं का अनुभव अलहदा होता है जिन यात्राओं पर निकलने से पहले आप पूरी तरह खाली  होते हैं।  नॉर्थ ईस्ट की यात्रा…

ओह! मेरी नोआ आखिर तुमने ऐसा क्यों किया…?

प्यारी नोआ ये ख़त तुम्हारे और उन लड़कियों के नाम जो जीवन से हार कर मृत्यु का चयन करती हैं। तुम्हारी मृत्यु केवल तुम्हारी ही नहीं बल्कि उन तमाम लड़कियों…

समाचार

बाबा नागार्जुन या गुनगुन पर पक्ष बनकर न सोचें

मरने से किसी का दोष कम नहीं होता, लेकिन किसी पर आरोप लगाने भर से कोई दोषी नहीं होता। इस मामले में न सही, किसी और मामले में ही सही…