चिट्ठी-पत्री

दिल्ली में नहीं, तेरे दिल में रहती हूं… रे पहाड़

ओ पहाड़! कैसा है रे!! तू सोचेगा वर्षों बाद याद कैसे आई। नहीं रे, भूली कहां हूं तुझे… हां चिट्ठी लिखने का ख्याल नहीं आया कभी। कल रात दिल्ली मौसी…

इंटरव्यू

कोरोना काल: मैं- कमरूद्दीन के आम, हनुमान मंदिर, कुल्फ़ी, पान व भुट्टे वाला

जब मैं यह लिख रहा हूं.. जुलाई बीतने वाली है। फुटपाथ, सड़कें, गली-मोहल्ले कोरोना से निर्भय हैं! जीवन की गतिशीलता निर्बाध चल रही है। लोगों के चेहरों पर मास्क ज़रूर…

यायावरी

वियना की यात्रा: हर शहर में कुछ न कुछ छोड़ आना चाहिए

यात्राएं बहुत कीं, पर लिखने की उमंग ने कभी ज़ोर नहीं मारा। पिछले वर्ष जब लिस्बन सम्मेलन के बहाने यूरोप के कुछ नगरों में जाने का अवसर मिला, तब भी…

मणिपुर, यही भी एक अनूठा देश है

यात्राएं जीवन का अनूठा अनुभव देती हैं। उन यात्राओं का अनुभव अलहदा होता है जिन यात्राओं पर निकलने से पहले आप पूरी तरह खाली  होते हैं।  नॉर्थ ईस्ट की यात्रा…

समाचार

बाबा नागार्जुन या गुनगुन पर पक्ष बनकर न सोचें

मरने से किसी का दोष कम नहीं होता, लेकिन किसी पर आरोप लगाने भर से कोई दोषी नहीं होता। इस मामले में न सही, किसी और मामले में ही सही…